नमन
वंदन
धन निरंकार जी
आइए आज इस मंत्र को आत्मसात् करते हैं
एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।
कर्माध्यक्षः सर्वभूताधिवासः साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्च॥
One God who alone is & He lurketh hidden in every creature for He pervadeth and is the inmost Self of all beings, He presideth over all work and is the home of all things living. He is the Mighty Witness who relateth thought with thought and again He is the Absolute in whom mood is not nor any attribute.
इस 'एकमेव देव'(एक ही देव परमात्मा ) का ही अस्तित्व है, प्रत्येक प्राणी में 'यही' गूढ़ रूप से छिपा हुआ है क्योंकि 'यही' सर्वव्यापी एवं समस्त प्राणियों का 'अन्तरात्मा' है, 'यह' सभी कर्मों का अध्यक्ष-स्वामी है, एवं सभी जीवसत्ताओं का आवास है। 'यही' सकल जगत का 'महान् साक्षी' है जो विचारों में परस्पर सम्बद्धता लाता है, 'यह' है 'निरपेक्ष' एवं निर्गुण, यह हर मनोभाव और गुण से परे है।
( एकः देवः - ekaḥ devaḥ - One God who alone | सर्वभूतेषु - sarvabhūteṣu - in every creature | गूढः - gūḍhaḥ - lurketh hidden | सर्वव्यापी - sarvavyāpī - He pervadeth all beings | सर्वभूतान्तरात्मा - sarvabhūtāntarātmā - the inmost Self of all beings | कर्माध्यक्षः - karmādhyakṣaḥ - He presideth over all work | सर्वभूताधिवासः - sarvabhūtādhivāsaḥ - He is the home of all things living | साक्षी - sākṣīi - the Mighty Witness | चेता - cetā - who relateth thought with thought ? | केवलः - kevalaḥ - the Absolute | निर्गुणः च - nirguṇaḥ ca - in whom mood is not nor any attribute |
बस बाहर भीतर के भेद से मुक्त हो कर इस एक को जानना ही परम् उपलब्धि है।
बाहर भीतर एकै जानौ, यह गुरु ज्ञान बताई।
जन नानक बिना आपा चीन्हे, मिटै न भ्रम की काई।।
अर्थात
बाहर और भीतर एक ही है - यही शाश्वत परम् ज्ञान गुरु प्रदान करता है।
जब तक हम स्वयं को नहीं पहचानते कि हम कौन हैं ? हमारा वास्तविक स्वरूप क्या है ? तब तक हमारे संशयों का नाश नहीं होता। इसलिए तत्व बोध से ब्रह्म फिर स्व का बोध ही सभी भ्रमों और संशयों से मुक्ति दिलाता है। या यूं कहूं जन्मों - जन्मों से लगी भ्रम की काई (शैवाल ) मिट जाता है। जैसे शैवाल जब पानी के उपर आ जाती है तो पानी को ढक देता है। नजर नहीं आता...परंतु जैसे ही शैवाल काई को हटाते हैं तो शुद्ध निर्मल जल प्रकट होता है। ऐसे ही भ्रमों की काई हटाने से शुद्ध चैतन्य का प्रकटाव हो जाता है और भ्रमों का खात्मा हो जाता है।
आज इतना ही
विस्तार में फिर कभी।
श्रद्धा पूर्वक
मानवता को समर्पित
निर्मल सोनी
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