Tuesday, 18 July 2023

आप आदिदेव - सनातन पुरुष हो

सुप्रभात 

धन निरंकार जी 

 प्रिय आत्मन्

आइए निद्रा में भी जागृत और जागृत में निद्रा का आनंद लेते हैं..

श्री मद्भग्वद गीता के 11वें अध्याय के इन निम्न श्लोकों द्वारा.... 


त्वमादिदेवः पुरुषः पुराणस्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्‌ ।

 वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम त्वया ततं विश्वमनन्तरूप ।। 


भावार्थ : आप आदिदेव और सनातन पुरुष हैं, आप इन जगत के परम आश्रय और जानने वाले तथा जानने योग्य और परम धाम हैं। हे अनन्तरूप! आपसे यह सब जगत व्याप्त अर्थात परिपूर्ण हैं॥38॥


वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशाङ्‍क:प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च

नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते।


भावार्थ : आप वायु, यमराज, अग्नि, वरुण, चन्द्रमा, प्रजा के स्वामी ब्रह्मा और ब्रह्मा के भी पिता हैं। आपके लिए हजारों बार नमस्कार! नमस्कार हो!! आपके लिए फिर भी बार-बार नमस्कार! नमस्कार!!॥39॥


नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व।

 अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वंसर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः ॥


भावार्थ : हे अनन्त सामर्थ्यवाले! आपके लिए आगे से और पीछे से भी नमस्कार! हे सर्वात्मन्‌! आपके लिए सब ओर से ही नमस्कार हो, क्योंकि अनन्त पराक्रमशाली आप समस्त संसार को व्याप्त किए हुए हैं, इससे आप ही सर्वरूप हैं॥40।। 

मेरा आग्रह रहता है कि इस पारब्रह्म परमेश्वर को जानना जरुरी है... तभी कह पाएंगे कि आप को नमस्कार.  Second Person की बात हो रही है।अर्थात जो सामने उपस्थित है...

 यहां हम Third Person की तरह परमात्मा को सम्बोधित नहीं कर रहे। जबकि मानव इसे कभी उपर कभी पर्वतों में तो कभी तीर्थ स्थलों पर ढूंढता है, जबकि परमात्मा का गुण है... सर्व व्यापकता। कभी शांतचित्त होकर विचार कीजिए कि हमारे शास्त्रों में कहा लिखा है। उस पर मनन चिंतन करना चाहिए। थोड़ा मुक्त कीजिए पुरातन संस्कारों से अपने आप को। सांसारिक विद्या की प्राप्ति बिना गुरु के हो नहीं सकती... तो क्या अध्यात्मिक प्राप्ति बिना सद्गुरु संभव है??? 

विचार कीजिए

 चिंतन कीजिए 

ताकि जीवन का यथार्थ प्राप्त किया जा सके। 

आइए जानिए... जीवन बीता जाए.. वक्त रहते संभलिए..

नहीं तो काल सब छीन कर ले जाता है, सारा धन-वैभव, 

यश, सम्पदा, मान - सम्मान, प्रतिष्ठा, यौवन सब व्यर्थ..

कुछ काम नहीं आता... अन्यथा न लें. जानिए और जीवन

 मुक्ति का आनंद लीजिए मुझ संग।।। 

शेष फिर कभी।

श्रद्धापूर्वक 

मानवता को समर्पित 

निर्मल सोनी🌺😘✍️

No comments:

Post a Comment